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भारत में शीघ्र ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने वाली है, तैयारी करें कुरुक्षेत्र विश्विद्यालय


कुरुक्षेत्र 4 अक्टूबर। हरियाणा कॉमर्स एंड मैनेजमेंट एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित 7 सप्ताह की शोध कार्यशाला के समापन सत्र में बोलते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की शैक्षणिक अधिष्ठात्री प्रो मंजुला चौधरी ने कहा कि अपने शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित करने की होड़ में भारत जे शोधकर्ता यहां की लोकल समस्याओं के न भूलें। आज के शोध में गुणवत्ता लाने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने ने कहा कि वैश्विक स्तर पर शोध में प्रयोग होने वाली कार्यप्रणाली को भारतीय शोधकर्ताओं को समझना तथा अपनाना चाहिए। इस दिशा में आयोजिय होने वाली इस शोध कार्यशाला का एक महत्त्वपूर्ण योगदान है।

इस अवसर पर बोलते हुए हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्विद्यालय के शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो कुलभूषण चन्देल ने कहा कि भारत में शीघ्र ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने वाली है। इसको लागू करने की ज़िम्मेदारी देश के विश्विद्यालयों पर होगी। इस दिशा में गहन चिंतन की आवश्यकता है। इस नीति की सफलता के लिए बुनियादी ढांचा सुदृढ़ करना अति आवश्यक है। आज 6 कमरों में चलने वाले कालेज या विश्विद्यालयों से अंतरराष्ट्रीय स्तर का शिक्षण या शोध की उम्मीद करना ठीक नहीं है। शोध में गुणवत्ता लाना अब अनिवार्य हो गया है और इसी दिशा में नई विधियों को अपनाने की आवश्यकता है। किसी भी शिक्षण संस्थान को आगे ले जाने में उसके नेतृत्व का बहुत बड़ा हाथ होता है और देश के शिक्षकों में इसी प्रकार का शैक्षणिक नेतृत्व करवाना अति आवश्यक है और इस दिशा में जागरूकता लाने की आवश्यकता है। हरियाणा कॉमर्स एंड मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा आयोजित यह कार्यशाला देश विदेश के शोधकर्ताओं को प्रेरित करती रहेगी।

इस कार्यक्रम में हरियाणा सरकार के शिक्षा मंत्री श्री कंवर पाल का संदेश पढ़ते हुए प्रो अंकेश्वर ने कहा कि आने वाला आत्मनिर्भर और स्वावलम्बी भारत का निर्माण विश्विद्यालयों द्वारा किया जाएगा और इस दिशा में नए शोध और ज्ञान को पोषित करने की आवश्यकता है। शिक्षा मंत्री ने कार्यशाला के सफल आयोजन के।लिए बधाई प्रेषित की।

हरियाणा कॉमर्स एंड मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष प्रो तेजेन्द्र शर्मा ने कार्यक्रम की प्रस्तावना देते हुए इस 7 साप्ताहिक कार्यशाला की मुख्य वक्ता डॉ रमणी सरना की सराहना करते हुए कहा कि परोपकार से किया गया ज्ञानसृजन का यह प्रयास शोधकर्ताओं के लिए बहुत लाभकारी रहेगा। उन्होने कहा कि भविष्य में शिक्षकों की ट्रेनिंग के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजिय किये जायेंगे। विशेष तौर पर ळैज् तथा एकाउंटिंग के सॉफ्टवेयर की ट्रेनिंग के विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में पंजाब कॉमर्स एंड मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो अश्विन भल्ला ने भी इस कार्यशाला के सफल आयोजन पर बधाई दी। डी ए वी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ संजीव शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा तथा मंच संचालन डॉ पूजा क्वात्रा ने किया। इस कार्यशाला में गुजरात कॉमर्स एसोसिएशन के डॉ आशीष दवेए दिल्ली विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रो डी पी एस वर्माए  वाणिज्य विभाग कुवि के प्रो अजय सुनेजाए प्रो महाबीर नरवालए प्रो सुभाषए प्रो रश्मिए जम्मू विश्विद्यालय की डॉ कोमल नगरए चो बंसीलाल विश्विद्यालय की प्रीति मिश्राए शिवजी कॉलेज की डॉ अनुभाए तान्याए लॉरेलए दीपकए नेहाए शालूए शत्रुघ्न आदि के साथ भारी संख्या में देश भर से शोधकर्ताओं ने भाग लिया। इस कार्यशाला के आयोजन में दयाल सिंह कॉलेज करनाल का वेबेक्स सॉफ्टवेयर उपलब्ध करवाया।

डॉ रमणी स्वर्णा दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वे देश विदेश में शिक्षा ग्रहण करकेए अनेक जानी मानी कम्पनियों में अनेक उच्च पदों पर कार्य करके अब शोधसाधना में समर्पित हैं। 7 सप्ताह तक चलने वाली कार्यशाला में उन्होंने शोध के बारीकियों को समझाया तथा आर सॉफ्टवेयर की अति गहनता से ट्रेनिंग दी। प्रत्येक प्रतिभागी से सम्पर्क कर उसकी शोध सम्बन्धी शिक्षण का अवलोकन किया। उनके इस निस्वार्थ सेवा के लिए कार्यशाला के आयोजकों तथा प्रतिभागियों ने उनकी विशेष सराहना की। प्रो तेजेन्द्र शर्मा ने कहा कि डॉ रमणी आज के संदर्भ में एक ऋषि की तरह से ज्ञान साधना कर रही हैं।


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